Author: sahitya36garh 01

नारी का करता मान सदा, मैं भारत का नवयुवा हूँ सनातन पावन धरा नमन, मर्यादा का मैं स्वर हूँ त्याग तपस्या जीवन मेरा, धर्म पथों का पथिक बना अन्यायों के तम को हरने, दीपक सा मैं जलता हूँ पत्नी रक्षा हित रघुनंदन, लंका सिंहासन डोल गया अधर्मी रावण धरती पर, क्षण भर में ही बोल गया मर्यादा की ज्योति लिए, अयोध्या पथ मैं चल पड़ा धर्म की राह दिखाने को, फिर से राम ही बन खड़ा बाणों की शय्या पर सोकर, व्रत को कभी न तोड़ा है भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा, जीवन भर मैंने जोड़ा है कुरुक्षेत्र की धूल बता…

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बरसों पुराने कच्चे घर की आखिरी खपरेल आज उतर रही थी। रामदयाल आँगन में खड़े नए पक्के मकान को गर्व से देख रहे थे। चमचमाती टाइलें, ऊँची दीवारें और लोहे का बड़ा फाटक सब कुछ वैसा ही था जैसा उन्होंने शहर से लौटे बेटे की इच्छा पर बनवाया था।गाँव वाले देखने आते और तरीफ़ करते,–“वाह अब तो शहर जैसा घर बन गया।”लेकिन रामदयाल की आँखें बार-बार सूनें आँगन पर टिक जातीं। कभी इसी आँगन में शाम ढले पड़ोसी जुटते थे, बच्चे हँसते थे, और चूल्हे की आँच पर रिश्ते पकते थे। अब बेटा ऊपर वाले कमरे में मोबाईल पर व्यस्त…

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छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और मिट्टी की खुशबू को अपनी लेखनी के माध्यम से जीवंत बनाए रखने वाले कवि विजय द्विवेदी लगातार साहित्य साधना में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, लोक परंपराओं, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति गहरा समर्पण दिखाई देता है। यही कारण है कि उनकी लेखनी सीधे छत्तीसगढ़ियों के हृदय को छू लेती है।आइए उनकी एक रचना पर गौर करते हैं। (1)जगह-जगह मन्दिर देवता के, हवय रे बसेरा,छत्तीस ठन हे धान नांव के, 36 नार पतेरा,महतारी के अपन बेटा बर मया हवय अड़-बड़,अईसन हवय संगी रे मोर सपना के छत्तीसगढ़ (2)अईस व्यासा…

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रायपुर वृंदावन हॉल में रविवार 24 मई को “Heaven Writes” द्वारा एक सफल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “हेवन राइट्स” केवल एक साहित्यिक मंच नहीं, बल्कि उन सपनों की आवाज़ है जिन्हें अक्सर बड़े मंचों तक पहुँचने का अवसर नहीं मिल पाता। यह ऐसा मंच है जो नए कलाकारों और साहित्य प्रेमियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करता है। इसके संस्थापक पार्थो मिस्त्री हैं, जो जिला कांकेर के पखांजूर क्षेत्र से आते हैं। छोटे से स्थान से होने के बावजूद उनका हौसला और सोच बेहद बड़ी है। समाजसेवा की भावना के साथ वे लगातार उभरते…

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“खबर साहित्य” के इस खास कड़ी में एक ऐसे कलाकार की बात होने जा रही है जिन्होंने पूरे विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। जिला मुंगेली के ग्राम भठलीकला की युवा कलाकार गोपिका कश्यप (ईशा) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का परचम लहराकर पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। गोपिका ने 11 से 15 मई 2026 तक शहर हनोई (वियतनाम) में आयोजित ग्लोबल 19th कॉम्पिटिशन एंड फेस्टिवल – देशराग कलानिधि सम्मान में शुद्ध कत्थक (Pure Kathak) की श्रेणी में मंत्रमुग्ध प्रस्तुति देकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। यह आयोजन नित्य धाम कला समिति, भिलाई द्वारा आयोजित किया…

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शहर के सांस्कृतिक भवन में आज कवि सम्मेलन था। बाहर बड़े -बड़े पोस्टर लगे थे। “प्रसिद्ध कवियों की महफ़िल” भीतर मंच सजा था और कुर्सियाँ लगभग भर चुकी थीं।श्यामलाल जो वर्षों से कविता लिख रहे थे, धीरे -धीरे जाकर पीछे की पंक्ति में बैठ गए। उन्हें छंद, शब्द और भाव की शुद्धता पर भरोसा था, लेकिन आजकल मंचो पर उनकी कोई पूछ नहीं थी। कार्यक्रम शुरू हुआ सबसे पहले एक कवि मंच पर आए।उन्होंने कविता कम चुटकुले अधिक सुनाए। लोग ठहाके लगाने लगे और तालियों की गूँज से हॉल भर गया। उन्हें फूलों की हार से सम्मानित किया गया।श्यामलाल चुपचाप…

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हमरा माटी हमर साहित्य के इस विशेष अंश में आज हम उन सभी छत्तीसगढ़ के बच्चों के बारे में बात करेंगे जो अपनी प्रतिभा को मंच तक नहीं पहुंच पा रहे हैं दरअसल यह गलती बच्चों को नहीं है बल्कि उस सिस्टम की है जो बच्चों को ये नहीं समझा पा रही कि अपने अंदर की प्रतिभा को मार देना एक गैर ज़मानती अपराध है। जबकि कई स्कूलों में ऐसे शिक्षक भी है जो इन बातों को मान्यता देते हैं और उन बच्चों को विशेष रूप से ध्यान में रख कर उनके टैलेंट पर गौर करते हैं। कई बच्चों की…

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इच्छाओं का कीडा झुलस रहा है मेरे भीतर। ना ही उस का कोई स्पष्ट चेहरा है ना ही इच्छा पूर्ति की कोई सूची। क्यूँ रेंग रहे हो मेरे अंदर ? जितना जितना तुम फैलते हो , उतने कांटे गड़ते है मेरे भीतर। निर्वाण के रस्ते में , आखिर क्यूं बाधा बने बैठे हो ? कोई हंसी , ठिठोली की आवाज़ सुनाई दी मुझे। मैं , अमीबा के सृजन समय से अस्तित्व में हूं। जितना मिटाना चाहोगी , मेरी आयु और बढ़ती जाएगी। सहमी हुई मैं .. तुम्हारी वजह से ही मैं एक किताबी कीडा बन चुकी हूं। ये शब्दों का…

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“हमर माटी|हमर चिह्नारी” के इस खास अंश में आज बात की जाएगी छत्तीसगढ़ी पंचांग “बछर” की, जिसके कर्ता-धर्ता हैं साहित्यकार ईश्वर साहू जी, जो कि “बंधी” के नाम से जाने जाते हैं। छत्तीसगढ़ की लोक कला संस्कृति में तो आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा है और अब आपने एक और अच्छी पहल “छत्तीसगढ़ी पंचांग” को सामने लाया है। ये केवल एक कैलेंडर नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को समेटें हुए घरों में न केवल सजा के रखने वाली बल्कि ज्ञान से भरी हुई सबसे खूबसूरत चीज़ है।इसकी खास बात ये है कि पूरी कैलेंडर छत्तीसगढ़ी भाषा को प्राथमिकता देती…

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आवा वो दीदी आवा गा सियान,सब जुर मिल के मनाबो हरेली के तिहारसब रीत भुलागे दुनियां दारी मेंनई ये कोनो कखरो चिन्हारी मेंनंदाय तिहार ल फेर जगाबो,गांव गली में अभियान चलाबो बांस काटे बार जंगल जाय,घर में बैठ के सब गेड़ी बनाएगली खोर म गेड़ी के रेला लगाएचढ़े गेड़ी त सब के मन ल भाय नांगरिहा हर औजार ल सुमिरत ,नांगर के धार ल पूजेबतर बुलक गे बयासी अगोरत, नांगर के नहना हर पूछेखार में पानी के धार बोहागे ,अन्नपूर्णा के अछरा हर हरियागेहमर हरेली तिहार हर आगे होगे बयासी बादर छागे, गिरीस पानी नांगर धोवागेअरे नांगरिहा थोकुन तहु थिरिया…

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