हमरा माटी हमर साहित्य के इस विशेष अंश में आज हम उन सभी छत्तीसगढ़ के बच्चों के बारे में बात करेंगे जो अपनी प्रतिभा को मंच तक नहीं पहुंच पा रहे हैं दरअसल यह गलती बच्चों को नहीं है बल्कि उस सिस्टम की है जो बच्चों को ये नहीं समझा पा रही कि अपने अंदर की प्रतिभा को मार देना एक गैर ज़मानती अपराध है।
जबकि कई स्कूलों में ऐसे शिक्षक भी है जो इन बातों को मान्यता देते हैं और उन बच्चों को विशेष रूप से ध्यान में रख कर उनके टैलेंट पर गौर करते हैं। कई बच्चों की रुचि साहित्य के प्रति है कई बच्चे नृत्य में अपने भविष्य को देखते है कई बच्चे पेंटिंग को अपना अब कुछ मानकर चल रहे हैं पर वो खुद ये बात बोल नहीं पा रहें हैं क्योंकि उन्हें स्कूल पढ़ने के लिए भेजा गया है बस यही बात उनको घर कर गई है कि यदि पढ़ाई के अलावा कुछ किया गया तो हम असफल माने जाएंगे।
इस सोच को बदलने के लिए साहित्य छत्तीसगढ़ अपने मंच को उन बच्चों को समर्पित करता है जो साहित्य कला और संस्कृति के क्षेत्र में अपने आप को स्वीकार करते हैं। उनकी कला का पूरा सम्मान किया जाएगा और कला प्रेमियों तक उनको पहुंचाने का काम बिना किसी स्वार्थ के साहित्य36गढ़ के मंच द्वारा किया जाएगा।
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