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    मोर सपना के छत्तीसगढ़ : कवि विजय चतुर्वेदी

    sahitya36garh 01By sahitya36garh 01May 26, 2026Updated:May 27, 2026 आज की कविता No Comments2 Mins Read
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    छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और मिट्टी की खुशबू को अपनी लेखनी के माध्यम से जीवंत बनाए रखने वाले कवि विजय द्विवेदी लगातार साहित्य साधना में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, लोक परंपराओं, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति गहरा समर्पण दिखाई देता है। यही कारण है कि उनकी लेखनी सीधे छत्तीसगढ़ियों के हृदय को छू लेती है।आइए उनकी एक रचना पर गौर करते हैं।

    (1)
    जगह-जगह मन्दिर देवता के, हवय रे बसेरा,
    छत्तीस ठन हे धान नांव के, 36 नार पतेरा,
    महतारी के अपन बेटा बर मया हवय अड़-बड़,
    अईसन हवय संगी रे मोर सपना के छत्तीसगढ़

    (2)
    अईस व्यासा धरती ल पानी देके, प्यास महू बुझाहु,
    नहर बांध तरिया बनाके, किसान के भाग जगाहू,
    मेहनत करके अन उपजाथन, हाथ मुठा म पकड़,
    अईसन हवय संगी रे, मोर सपना के छत्तीसगढ़|
      (3)
    बिना हाथ रोजगार के, बनव झन ककरो बोझ,
    बुढ़हापा म दाई के सहारा, ध्यान लगाके सोच,
    खुले हे इंग्लिस मीडियम जाके बने तै हर पड़,
    अईसन हवय संगी रे, मोर सपना के छत्तीसगढ़|
      (4)
    गुर्तुर हवय संस्कृति हमर, गुर्तुर बोली भाखा,
    गुर्तुर हवय ठेठरी खुर्मी, बतासा चीला चाखा,
    गाँव के गिल्ली डंडा संगी, मजा आथे अड़ बड़,
    अईसन हवय संगी रे, मोर सपना के छत्तीसगढ़|
     (5)
    पड़ लिखके सब मनखे, डॉक्टर बनय कलेक्टर,
    पैसा सबके पास राहय, शिक्षक वकील एक्टर,
    हक अधिकार ल जाने बर, संविधान के लेख पड़,
    अईसन हवय संगी रे, मोर सपना के छत्तीसगढ़|
     (6)
    पहाड़ पर्वत झरना, सब मया के गीत गावत हे,
    बांस,सरई ,साल,सगोन, ये धरती ल सजावत हे,
    हिम्मत करके हिमालय तै, भी मैकल श्रेणी चड़,
    अईसन हवय संगी रे मोर सपना के छत्तीसगढ़

    आज की कविता में उनकी यह रचना, जिसमें छत्तीसगढ़ की माटी के प्रति प्रेम, लोक संवेदनाओं की मिठास और सांस्कृतिक चेतना का सुंदर समावेश देखने को मिलता है। उनकी लेखनी केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा का प्रतिबिंब प्रतीत होती है।वर्तमान समय में जब लोक संस्कृति आधुनिकता की दौड़ में कहीं पीछे छूटती जा रही है, ऐसे दौर में विजय द्विवेदी जैसे साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उनकी कविताएँ आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करती हैं।

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