Author: sahitya36garh 01

Коли варто звернутися до фахівця Допомога фахівця має сенс, коли завдання складне, терміни обмежені, а помилка може призвести до зайвих витрат. Це стосується підготовки документів, організації заходів, створення проєктів або опрацювання великого обсягу інформації. Якщо ж завдання добре знайоме, не потребує спеціальних знань і допускає кілька спроб, самостійне виконання часто буде швидшим та дешевшим. Перед тим як планувати роботу, варто сформулювати бажаний результат, назвати строк і перелічити матеріали. У такому формулюванні Андрій Яковчук Нетішин може бути зрозумілим орієнтиром для пошуку відповідного професіонала. Конкретний опис спрощує порівняння пропозицій і допомагає заздалегідь визначити, які етапи входять до роботи. Андрій Яковчук Нетішин може…

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रायपुर, 19 जुलाई। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था वक्ता मंच, रायपुर द्वारा 19 जुलाई को एक भव्य साहित्यिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करना, उनमें आत्मविश्वास का विकास करना तथा उनकी साहित्यिक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर से आए रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं एवं साहित्यिक रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “नवोदित रचनाकार सम्मान” रहा, जिसके अंतर्गत चयनित साहित्यकारों को सम्मान-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनकी साहित्य साधना का सम्मान किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि वरिष्ठ…

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दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती हैं—”सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।” कुछ ऐसा ही सोनम वांगचुक करना चाहते थे। दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने खड़ा एक गंभीर प्रश्न है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आती है कि संवाद की जगह टकराव दिखाई देने लगता है? सोनम वांगचुक का आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक पद की मांग को लेकर नहीं था।…

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लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं है कि नेताओं पर हमले हो रहे हैं, बल्कि यह है कि समाज की प्रतिक्रिया पीड़ित के नाम से तय होने लगी है। यदि थप्पड़ हमारे पसंदीदा व्यक्ति को पड़े तो यह लोकतंत्र पर हमला कहलाता है। लेकिन यदि यही थप्पड़ किसी विरोधी विचार वाले व्यक्ति को लगे, तो यह मज़ाक, मीम और मनोरंजन का विषय बन जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके के साथ हुई घटना में यही देखा गया। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे थे, जबकि कुछ लोग इस पर ठहाके लगा…

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मैं कई बार अपने शव को सीने से लगाकर रोती हूँ,कई बार नाकामयाबी का कफ़न उसे ओढ़ाती हूँ।कई बार मुझे उसे समझाना पड़ता है मृत्यु एक शरीर में केवल एक बार नहीं होती,मनुष्य अपने जीवन में अनेक बार मरता है।संसार मांस का भूखा है,और कई बार अपनी ही चाहत के क़त्ल का गवाह बनना पड़ता है।मनुष्य की कल्पना समस्त संभावनाओं का मानचित्र नहीं बना सकती।मेरा शव मुझसे बहुत कुछ कहता है”इतना कठोर जीवन बोया ही क्यों जाता है?जब अंततः साथ कुछ जाना नहीं,तो यह ढोंग हर श्वास पर पिरोया ही क्यों जाता है?अरे, गुमनामी भली इस मायावी संसार के मोह…

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हमर माटी हमर साहित्य के इस विशेष अंश में छत्तीसगढ़ी संगीत जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर आई है। एप्पी राजा (चेतन चांडक), जिन्होंने छत्तीसगढ़ी रैप को नई पहचान दी, लंबी बीमारी के बाद निधन हो गए। उन्होंने रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से संगीत प्रेमियों, प्रशंसकों और कला जगत में शोक की लहर फैल गई है।एप्पी राजा उन कुछ कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को आधुनिक रैप संगीत के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया। उनका प्रसिद्ध रैप गीत “टूरा भोको लोलो” युवाओं के…

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श्यामू शहर के एक निर्माण साइट पर मजदूरी करता था। सुबह से शाम तक खून -पसीना बहाने के बाद भी उसकी मजदूरी इतनी नहीं होती थी कि परिवार भर पेट खाना खा सके। त्योहारों का मौसम था। शहर की गलियाँ रोशनी से जगमगा रही थी, मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही थी लेकिन श्यामू की झोपड़ी में चूल्हा दो दिनों से ठंडा पड़ा था।उसकी पत्नी राधा बच्चों को बहला रही थी,–“कल कुछ अच्छा बना दूँगी।”पर उसे खुद नहीं पता था कि आटा आएगा कहाँ से। छोटा बेटा सोनू सामने वाले घर में पटाखे और मिठाइयाँ देखकर बोला,–बाबा हमारे घर…

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एक दौर था जब कविता कवि की पहचान बनती थी एक कवि अपनी सबसे लोकप्रिय कविता के नाम से जाना जाता था अब ज़माना थोड़ा बदल गया है अब कवि अपनी कविता को पहचान दिलाने के लिए के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाता दिखाई पड़ता है। एक अच्छी कविता लिखी जाए या न लिखी जाए पर प्रचार तंत्र की व्यवस्था पहले से ही तय हो जाती है। बैकग्राउंड में कौन सी आकर्षक इमेज लगानी है बैकग्राउंड में कौन सी आकर्षक और गहरी संगीत लगानी है।रील, फोटोशूट, पोस्टर डिजाइन या यूं कहूँ कि इस स्तर का आडंबर कि कोई नेता भी…

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बशीर बद्र सिर्फ़ शायर नहीं,रिश्तों की नरम धूप हैं।उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।कुछ लोग किताबों में दर्ज होते हैं। कुछ लोग इतिहास में। और कुछ ऐसे होते हैं जो लोगों की रोज़मर्रा की बातचीत, प्रेम, विरह, तन्हाई और यादों में बस जाते हैं।डॉ. बशीर बद्र ऐसे ही शायर थे।उनके जाने की खबर सुनकर ऐसा नहीं लगा कि कोई शायर चला गया है। ऐसा लगा जैसे हमारी भाषा का एक बेहद मुलायम, बेहद आत्मीय कोना अचानक थोड़ा सूना हो गया हो। वे उन विरले शायरों में थे जिनकी…

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साहित्यकार परिचय के इस विशेष अंश में आज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. सरोज दुबे जी की साहित्यिक यात्रा पर गौर करते हैं। साहित्य की दुनिया में निरंतर सृजन, समर्पण और अथक परिश्रम के बल पर छत्तीसगढ़ की डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’ ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। छत्तीसगढ़ की इस प्रतिभाशाली साहित्यकार ने न केवल लेखन की विविध विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है, बल्कि साहित्यिक संगठनों के माध्यम से साहित्य सेवा का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। एम.ए. एल.एल.बी. शिक्षित डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’ गद्य, पद्य तथा छंदबद्ध रचनाओं…

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