Author: sahitya36garh 01

रायपुर, 19 जुलाई। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था वक्ता मंच, रायपुर द्वारा 19 जुलाई को एक भव्य साहित्यिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करना, उनमें आत्मविश्वास का विकास करना तथा उनकी साहित्यिक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर से आए रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं एवं साहित्यिक रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “नवोदित रचनाकार सम्मान” रहा, जिसके अंतर्गत चयनित साहित्यकारों को सम्मान-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनकी साहित्य साधना का सम्मान किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि वरिष्ठ…

Read More

दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती हैं—”सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।” कुछ ऐसा ही सोनम वांगचुक करना चाहते थे। दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने खड़ा एक गंभीर प्रश्न है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आती है कि संवाद की जगह टकराव दिखाई देने लगता है? सोनम वांगचुक का आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक पद की मांग को लेकर नहीं था।…

Read More

लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं है कि नेताओं पर हमले हो रहे हैं, बल्कि यह है कि समाज की प्रतिक्रिया पीड़ित के नाम से तय होने लगी है। यदि थप्पड़ हमारे पसंदीदा व्यक्ति को पड़े तो यह लोकतंत्र पर हमला कहलाता है। लेकिन यदि यही थप्पड़ किसी विरोधी विचार वाले व्यक्ति को लगे, तो यह मज़ाक, मीम और मनोरंजन का विषय बन जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके के साथ हुई घटना में यही देखा गया। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे थे, जबकि कुछ लोग इस पर ठहाके लगा…

Read More

मैं कई बार अपने शव को सीने से लगाकर रोती हूँ,कई बार नाकामयाबी का कफ़न उसे ओढ़ाती हूँ।कई बार मुझे उसे समझाना पड़ता है मृत्यु एक शरीर में केवल एक बार नहीं होती,मनुष्य अपने जीवन में अनेक बार मरता है।संसार मांस का भूखा है,और कई बार अपनी ही चाहत के क़त्ल का गवाह बनना पड़ता है।मनुष्य की कल्पना समस्त संभावनाओं का मानचित्र नहीं बना सकती।मेरा शव मुझसे बहुत कुछ कहता है”इतना कठोर जीवन बोया ही क्यों जाता है?जब अंततः साथ कुछ जाना नहीं,तो यह ढोंग हर श्वास पर पिरोया ही क्यों जाता है?अरे, गुमनामी भली इस मायावी संसार के मोह…

Read More

हमर माटी हमर साहित्य के इस विशेष अंश में छत्तीसगढ़ी संगीत जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर आई है। एप्पी राजा (चेतन चांडक), जिन्होंने छत्तीसगढ़ी रैप को नई पहचान दी, लंबी बीमारी के बाद निधन हो गए। उन्होंने रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से संगीत प्रेमियों, प्रशंसकों और कला जगत में शोक की लहर फैल गई है।एप्पी राजा उन कुछ कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को आधुनिक रैप संगीत के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया। उनका प्रसिद्ध रैप गीत “टूरा भोको लोलो” युवाओं के…

Read More

श्यामू शहर के एक निर्माण साइट पर मजदूरी करता था। सुबह से शाम तक खून -पसीना बहाने के बाद भी उसकी मजदूरी इतनी नहीं होती थी कि परिवार भर पेट खाना खा सके। त्योहारों का मौसम था। शहर की गलियाँ रोशनी से जगमगा रही थी, मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही थी लेकिन श्यामू की झोपड़ी में चूल्हा दो दिनों से ठंडा पड़ा था।उसकी पत्नी राधा बच्चों को बहला रही थी,–“कल कुछ अच्छा बना दूँगी।”पर उसे खुद नहीं पता था कि आटा आएगा कहाँ से। छोटा बेटा सोनू सामने वाले घर में पटाखे और मिठाइयाँ देखकर बोला,–बाबा हमारे घर…

Read More

एक दौर था जब कविता कवि की पहचान बनती थी एक कवि अपनी सबसे लोकप्रिय कविता के नाम से जाना जाता था अब ज़माना थोड़ा बदल गया है अब कवि अपनी कविता को पहचान दिलाने के लिए के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाता दिखाई पड़ता है। एक अच्छी कविता लिखी जाए या न लिखी जाए पर प्रचार तंत्र की व्यवस्था पहले से ही तय हो जाती है। बैकग्राउंड में कौन सी आकर्षक इमेज लगानी है बैकग्राउंड में कौन सी आकर्षक और गहरी संगीत लगानी है।रील, फोटोशूट, पोस्टर डिजाइन या यूं कहूँ कि इस स्तर का आडंबर कि कोई नेता भी…

Read More

बशीर बद्र सिर्फ़ शायर नहीं,रिश्तों की नरम धूप हैं।उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।कुछ लोग किताबों में दर्ज होते हैं। कुछ लोग इतिहास में। और कुछ ऐसे होते हैं जो लोगों की रोज़मर्रा की बातचीत, प्रेम, विरह, तन्हाई और यादों में बस जाते हैं।डॉ. बशीर बद्र ऐसे ही शायर थे।उनके जाने की खबर सुनकर ऐसा नहीं लगा कि कोई शायर चला गया है। ऐसा लगा जैसे हमारी भाषा का एक बेहद मुलायम, बेहद आत्मीय कोना अचानक थोड़ा सूना हो गया हो। वे उन विरले शायरों में थे जिनकी…

Read More

साहित्यकार परिचय के इस विशेष अंश में आज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. सरोज दुबे जी की साहित्यिक यात्रा पर गौर करते हैं। साहित्य की दुनिया में निरंतर सृजन, समर्पण और अथक परिश्रम के बल पर छत्तीसगढ़ की डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’ ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। छत्तीसगढ़ की इस प्रतिभाशाली साहित्यकार ने न केवल लेखन की विविध विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है, बल्कि साहित्यिक संगठनों के माध्यम से साहित्य सेवा का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। एम.ए. एल.एल.बी. शिक्षित डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’ गद्य, पद्य तथा छंदबद्ध रचनाओं…

Read More

इन दिनों साहित्य और प्रचार के बीच की दूरी लगातार कम होती जा रही है। एक तरफ, साहित्यकार का काम समाज, संवेदना और सच को व्यक्त करना है। दूसरी तरफ, प्रचारतंत्र उसे लोकप्रियता, पुरस्कार और मंचों की चमक-दमक के लुप्त में लाने की कोशिश करता है। इसके परिणामस्वरूप कई साहित्यकार अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता के बजाय अपनी दृश्यता और प्रसिद्धि को महत्व देने लगे हैं। यह प्रवृत्ति साहित्य के असली उद्देश्य को कमजोर करती है। सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों का विस्तार ने साहित्य को अधिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने का मौका दिया है, लेकिन इसके साथ ही आत्म-प्रचार की प्रवृत्ति…

Read More