साहित्यकार परिचय साहित्यकार : बीनाAKA : Bee❤️ing ( been a mystic) स्थान : सूरत (गुजरात)YQ 🆔 : https://www.yourquote.in/beena_5559 साहित्य36गढ़.com अपने लेख के माध्यम से केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि संपूर्ण भारत के उन साहित्य साधकों,लेखकों, कवियों एवं कवयित्रीयों की बात करता है जिनको मुख्यधारा में आना ज़रूरी है। आज के साहित्यकार परिचय में हम बात करने वाले हैं लेखिका,समालोचक एवं कवयित्री बीना जी के बारे में। ये एक ऐसी छुपी रुस्तम लेखिका हैं जो अपने आप में तल्लीन रहतीं हैं आपको किसी सम्मान की आवश्यकता नहीं आप पाठकों की आवाज़ हो। आपको पढ़ने वालों को लगता है कि उत्कृष्ट रचनाओं…
Author: sahitya36garh 01
अमृता सिर्फ शब्द नहीं लिखती थीं, वे अपनी आत्मा की राख में उँगलियाँ डुबोकर वाक्यों को जन्म देती थीं। उनकी भाषा में प्रेम कोई उत्सव नहीं था, वह एक अधजला चिराग था , जो रात भर धुआँ देता रहा,पर बुझा नहीं।उन्होंने स्त्री को कविता की सजावट नहीं बनाया,बल्कि उसकी चुप्पियों के भीतर छिपे सदियों के विरह को आवाज़ दी। उनकी हर पंक्ति में एक ऐसी औरत सांस लेती है,जो टूटती भी है, प्रेम भी करती है, और फिर अपनी ही राख से धीरे-धीरे पुनः जन्म लेती है। अमृता की कविताएँ .. किसी नदी के किनारे रखे उस दीपक जैसी लगती…
आज की कविता में प्रस्तुत है “गतिशील गंतव्य” कवयित्री : बीना, सूरत (गुजरात) फिर से एक बार ..भगवान बुद्ध और अंगुलिमाल का आमना सामना हुआ। कहां पर लेकिन ?कोई घने जंगल में ?नही .. मेरे भीतर हीदोनो मौजूद रहते हैअक्सर बातें करते है तुमने बुद्ध का एक बाहरी कवच बना रखा है बस .. हल्की सी खरोच , आहट से ये टूट जाता हैउस के अंदर तो आग जैसा मैं ही रहता हूंअंगुलिमाल ने कहा कहो मुझे .. खुले किसी जंगल मेंतुम्हारा संपूर्ण अस्तित्व किस रूप मेंप्रकट होगा बुद्ध या बुद्ध की खालधारण किया हुआ अंगुलिमालसत्य की एक आवाज़ गूंजने…
पुस्तक – बहादुर कलारिन|लेखक – श्री भागवत जायसवाल (लेखक व प्रशासनिक अधिकारी) समालोचक : रमेश सारथी “गौर”, रायगढ़(छत्तीसगढ़) मेरी नज़र से— एक अद्भुत साहित्यिक यात्रा”बहादुर कलारिन, श्री भागवत जायसवाल की चर्चित कृति, पाठक को साहस, संघर्ष और स्त्री-अस्मिता के एक जीवंत संसार में ले जाती है।बहादुर कलारिन भारतीय लोकजीवन की एक साहसी, स्वाभिमानी और संघर्षशील नारी के रूप में स्मरण की जाती हैं। छत्तीसगढ़ की पावन धरा को अपने शौर्य और पराक्रम से सिंचित करने वाली, कलार समाज का पौराणिक इतिहास ,देवी स्वरूपा वीरांगना माता बहादुर कलारिन ग्राम सोरर प्राचीन सरहरगढ़, बालोद में जन्म लेकर न केवल ग्रामीण अंचल का…
संपादकीय लेख में आज संपादक चैतन्य गोपाल की कलम से “सार्थक जीवन की ओर” पर नज़र डालते हैं। “सार्थक जीवन की ओर” शीर्षक न केवल एक शीर्षक है बल्कि यह एक यात्रा है जो किसी व्यक्तित्व द्वारा की जाती है। सार्थक जीवन एक उद्देश्यपूर्ण प्रयास है। हालांकि जिसके सफल या असफल होने का कोई निश्चित मानक नहीं है, पर इसके सार्थक होने में असफलता बाधा नहीं बन पाती। अतीत के पन्नों को अगर खंगाला जाए तो हम पाएंगे कि सामान्यतः जीवन की सार्थकता सामाजिक क्षेत्रों में वरीयता पा लेने या धार्मिक अथवा आध्यात्मिक कर्मों में प्रवृत्त साधकों की तृप्त भावनाओं…
