Close Menu
साहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारीसाहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारी
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • वक्ता मंच रायपुर ने नवोदित रचनाकारों को दिया सम्मान, काव्य गोष्ठी में बिखरे साहित्य के रंग
    • सवाल सिर्फ आंदोलन का नहीं – चैतन्य गोपाल
    • ‘कॉकरोच’ को पड़ा थप्पड़, और बेनकाब हुई हमारी दोहरी मानसिकता
    • संसार मांस का भूखा : ✍️ cosmic Whale
    • चल दिस हमर भोको लोलो रैपर “एप्पी राजा”|छत्तीसगढ़ महतारी के बेटा अमर रही
    • पर्व का स्वाद : डॉ सरोज दुबे “विधा”
    • लोकप्रियता किसकी? कवि की या कविता की : चैतन्य गोपाल
    • बशीर बद्र सिर्फ़ शायर नहीं,रिश्तों की नरम धूप हैं : बीना
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Contact
    Facebook X (Twitter) Instagram
    साहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारीसाहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारी
    Subscribe
    Tuesday, August 4
    • Home
    • हमर माटी | हमर साहित्य
    • आज की कविता
    • साहित्यकार परिचय
    • खबर साहित्य
    • संपादकीय
    साहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारीसाहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारी
    Home»साहित्यकार परिचय

    आत्मा की धीमी लेकिन गहरी आवाज़ : ”बीना”

    sahitya36garh 01By sahitya36garh 01May 11, 2026Updated:May 13, 2026 साहित्यकार परिचय 1 Comment3 Mins Read
    credit : beena beeing (poet)
    Share
    WhatsApp Facebook Twitter LinkedIn Telegram Threads Copy Link

    साहित्यकार परिचय

    साहित्यकार : बीना
    AKA : Bee❤️ing ( been a mystic) स्थान : सूरत (गुजरात)
    YQ 🆔 : https://www.yourquote.in/beena_5559

    साहित्य36गढ़.com अपने लेख के माध्यम से केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि संपूर्ण भारत के उन साहित्य साधकों,लेखकों, कवियों एवं कवयित्रीयों की बात करता है जिनको मुख्यधारा में आना ज़रूरी है।
    आज के साहित्यकार परिचय में हम बात करने वाले हैं लेखिका,समालोचक एवं कवयित्री बीना जी के बारे में।
    ये एक ऐसी छुपी रुस्तम लेखिका हैं जो अपने आप में तल्लीन रहतीं हैं आपको किसी सम्मान की आवश्यकता नहीं आप पाठकों की आवाज़ हो। आपको पढ़ने वालों को लगता है कि उत्कृष्ट रचनाओं को जन्म देने वाली ये लेखिका आखिर क्यों मुख्यधारा से दूर रहतीं हैं? दरअसल यही बात आपको औरों से अलग करती है पर साहित्य36गढ़ आपको आज खींच लाया है।

    बीना जी की रचनाओं में किसी तरह की दिखावटी आध्यात्मिकता नहीं दिखाई देती। आपकी रचनाएं एक लंबे आत्ममंथन और रिश्तों के अनुभव से निकली हुई प्रतीत होती है, क्योंकि इस तरह की लेखनी तत्काल भावुकता से संभव नहीं है।
    इसके साथ ही आपकी रचनाओं में कोई नकारात्मकता दिखाई नहीं देती आप अपनी रचनाओं को अपने भीतर के खालीपन से बहुत धीमी और सधी हुई भाषा में व्यक्त करती हैं न कि किसी शोर के साथ बाहर आतीं हैं, यही कारण है जो पाठकों के अंतर्मन में गहरा प्रभाव डालता है।

    प्रिय पाठको,आइए बीना जी की एक रचना पर नज़र डालते हैं।

    शीर्षक : गतिशील गंतव्य

    फिर से एक बार ..
    भगवान बुद्ध और अंगुलिमाल का आमना सामना हुआ।

    कहां पर लेकिन ?
    कोई घने जंगल में ?
    नही .. मेरे भीतर ही
    दोनो मौजूद रहते है
    अक्सर बातें करते है

    तुमने बुद्ध का एक बाहरी कवच बना रखा है बस .. हल्की सी खरोच , आहट से ये टूट जाता है
    उस के अंदर तो आग जैसा मैं ही रहता हूं
    अंगुलिमाल ने कहा

    कहो मुझे .. खुले किसी जंगल में
    तुम्हारा संपूर्ण अस्तित्व किस रूप में
    प्रकट होगा

    बुद्ध या बुद्ध की खाल
    धारण किया हुआ अंगुलिमाल
    सत्य की एक आवाज़ गूंजने लगी मेरे भीतर
    अंगुलिमाल अंगुलिमाल

    फिर से एक आवाज़ सुनी मैंने

    ठीक है .. तुम्हारे भीतर की अग्नि में
    सब झोंक दो .. जो है वो , नही है वो भी

    तथागत का चेहरा उभर रहा है
    मुझ में , मुझ से
    …………………….
    उपरोक्त कविता में जिस तरह कवयित्री ने बुद्ध और अंगुलिमाल को न केवल पात्र बताया है बल्कि “अपने भीतर” दो अवस्थाओं को केंद्र बिंदु मानकर पूरी रचना को एक अलग आयाम तक पहुंचा दिया है इस रचना से एक बात उभर कर आती है कि क्या मनुष्य वास्तव में शांत है या केवल शांत होने का आडंबर कर रहा है? क्योंकि मनुष्य का क्रोध, हिंसा और अज्ञानता तो उसे अंधेरे में लेकर जाता है तो फिर कैसे मनुष्य शांत हुआ?

    कविता का अंतिम भाग “तथागत का चेहरा उभर रहा है” 

    जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि बीना की रचनाएं नकारात्मकता से परे, प्रेरणा देने का कार्य करती है तथागत का चेहरा उभरना मतलब जब आप अपने आप को स्वीकार लेते हैं और परिवर्तन के लिए एक कदम आगे बढ़ते हैं तब उस अंगुलिमाल के भीतर जन्म लेते हैं बुद्ध!

    संपादक की कलम से बीना जी के लिए एक कविता :-

    समस्त यातनाओं के बीच
    एक क्षणिक ईकाई तुम
    जिसे समझ पाना
    किसी विधा को सीखने से कम नहीं
    इन तमाम भावनाओं का
    पृथक स्पष्टीकरण मांगता मेरा मन
    और हर बार की तरह
    निरुत्तर
    मेरा हृदय

    धन्यवाद

    atma ki dheemi Lekin gahri awaz beena beeing tathagat ki or आत्मा की धीमी लेकिन गहरी आवाज़ बीना तथागत की ओर बीना बीइंग
    Share. WhatsApp Facebook Twitter LinkedIn Threads Telegram Copy Link
    sahitya36garh 01
    • Website

    Keep Reading

    साहित्य साधना से बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’ बनीं अनेक साहित्यकारों की प्रेरणा

    View 1 Comment

    1 Comment

    1. Beena on May 12, 2026 7:19 am

      😊😊❤️❤️❤️😊

      Reply
    Leave A Reply Cancel Reply

    Read More

    पर्व का स्वाद : डॉ सरोज दुबे “विधा”

    June 19, 2026

    लोकप्रियता किसकी? कवि की या कविता की : चैतन्य गोपाल

    June 19, 2026

    हमर माटी | हमर कैलेण्डर : साहित्यकार ईश्वर साहू “बंधी” के छत्तीसगढ़ी पंचांग

    May 14, 2026

    बशीर बद्र सिर्फ़ शायर नहीं,रिश्तों की नरम धूप हैं : बीना

    June 16, 2026

    सार्थक जीवन की ओर : ✍️ चैतन्य गोपाल

    May 6, 2026

    मोर सपना के छत्तीसगढ़ : कवि विजय चतुर्वेदी

    May 26, 2026
    Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

    Categories

    • हमर माटी | हमर साहित्य
    • आज की कविता
    • साहित्यकार परिचय
    • खबर साहित्य
    • संपादकीय

    LInks

    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    • Contact Us

    About Editor

    Name: – Chaitanya Gopal 

    Email ID: – sahitya36garh@gmail.com

    Contact Number: – +91 7415 233 154

    Address: – Office Sahitya36garh, Laxmi Niwas Building. Ground Floor, Juna Bilaspur, 495001

    © 2026 Website Designed by साहित्य36गढ़.
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.