Close Menu
साहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारीसाहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारी
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • वक्ता मंच रायपुर ने नवोदित रचनाकारों को दिया सम्मान, काव्य गोष्ठी में बिखरे साहित्य के रंग
    • सवाल सिर्फ आंदोलन का नहीं – चैतन्य गोपाल
    • ‘कॉकरोच’ को पड़ा थप्पड़, और बेनकाब हुई हमारी दोहरी मानसिकता
    • संसार मांस का भूखा : ✍️ cosmic Whale
    • चल दिस हमर भोको लोलो रैपर “एप्पी राजा”|छत्तीसगढ़ महतारी के बेटा अमर रही
    • पर्व का स्वाद : डॉ सरोज दुबे “विधा”
    • लोकप्रियता किसकी? कवि की या कविता की : चैतन्य गोपाल
    • बशीर बद्र सिर्फ़ शायर नहीं,रिश्तों की नरम धूप हैं : बीना
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Contact
    Facebook X (Twitter) Instagram
    साहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारीसाहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारी
    Subscribe
    Tuesday, August 4
    • Home
    • हमर माटी | हमर साहित्य
    • आज की कविता
    • साहित्यकार परिचय
    • खबर साहित्य
    • संपादकीय
    साहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारीसाहित्य छत्तीसगढ़ – हमर माटी हमर चिन्हारी
    Home»आज की कविता

    मंच का मापदंड : ✍️ डॉ. सरोज दुबे “विधा”

    sahitya36garh 01By sahitya36garh 01May 22, 2026Updated:May 22, 2026 आज की कविता No Comments2 Mins Read
    साभार - डॉ सरोज दुबे "विधा"जी
    Share
    WhatsApp Facebook Twitter LinkedIn Telegram Threads Copy Link

    शहर के सांस्कृतिक भवन में आज कवि सम्मेलन था। बाहर बड़े -बड़े पोस्टर लगे थे। “प्रसिद्ध कवियों की महफ़िल” भीतर मंच सजा था और कुर्सियाँ लगभग भर चुकी थीं।श्यामलाल जो वर्षों से कविता लिख रहे थे, धीरे -धीरे जाकर पीछे की पंक्ति में बैठ गए। उन्हें छंद, शब्द और भाव की शुद्धता पर भरोसा था, लेकिन आजकल मंचो पर उनकी कोई पूछ नहीं थी।

    कार्यक्रम शुरू हुआ सबसे पहले एक कवि मंच पर आए।उन्होंने कविता कम चुटकुले अधिक सुनाए। लोग ठहाके लगाने लगे और तालियों की गूँज से हॉल भर गया। उन्हें फूलों की हार से सम्मानित किया गया।श्यामलाल चुपचाप देखते रहे। उसके बाद कई कवि आए। किसी नें हास्य सुनाया किसी नें तुकबंदी वाले आसान गीत।

    असली कविता, गहरा भाव, और शिल्प कहीं छूटते जा रहे थे।बीच में आयोजक मंच पर आए और बोले, –“आज के लोकप्रिय कवियों को विशेष सम्मान मिलेगा जिन्होंने दर्शकों का दिल जीता है।”सम्मान उन लोगों को मिला जिनकी लोकप्रियता अधिक थी ज्ञान कम।श्यामलाल के बगल में बैठे एक वृद्ध कवि नें धीमे से कहा, –“अब मंचो पर कविता नहीं भीड़ का मनोरंजन बिकता है।” श्यामलाल ने उदास स्वर में कहा -“मंच का मापदंड बदल गया है।”

    डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’ |रायपुर (छत्तीसगढ़)

    picture credit ,: Dr. saroj dubey “vidha”

    Share. WhatsApp Facebook Twitter LinkedIn Threads Telegram Copy Link
    sahitya36garh 01
    • Website

    Keep Reading

    संसार मांस का भूखा : ✍️ cosmic Whale

    पर्व का स्वाद : डॉ सरोज दुबे “विधा”

    हाँ मैं युवा हूँ :✍️कवि लीलाधर सिन्हा

    पक्का बना मकान – डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’

    मोर सपना के छत्तीसगढ़ : कवि विजय चतुर्वेदी

    तथास्तु : ✍️बीना

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Read More

    मंच का मापदंड : ✍️ डॉ. सरोज दुबे “विधा”

    May 22, 2026

    वक्ता मंच रायपुर ने नवोदित रचनाकारों को दिया सम्मान, काव्य गोष्ठी में बिखरे साहित्य के रंग

    July 22, 2026

    हमर हरेली – हरेली त्योहार नहीं संस्कार है : मोकेंद्र कन्नौजे

    May 13, 2026

    मोर सपना के छत्तीसगढ़ : कवि विजय चतुर्वेदी

    May 26, 2026

    बशीर बद्र सिर्फ़ शायर नहीं,रिश्तों की नरम धूप हैं : बीना

    June 16, 2026

    गतिशील गंतव्य : ✍️बीना

    May 10, 2026
    Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

    Categories

    • हमर माटी | हमर साहित्य
    • आज की कविता
    • साहित्यकार परिचय
    • खबर साहित्य
    • संपादकीय

    LInks

    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    • Contact Us

    About Editor

    Name: – Chaitanya Gopal 

    Email ID: – sahitya36garh@gmail.com

    Contact Number: – +91 7415 233 154

    Address: – Office Sahitya36garh, Laxmi Niwas Building. Ground Floor, Juna Bilaspur, 495001

    © 2026 Website Designed by साहित्य36गढ़.
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.