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    अंतरराष्ट्रीय मंच पर छाई मुंगेली की बेटी : कत्थक में गोपिका कश्यप को प्रथम स्थान

    sahitya36garh 01By sahitya36garh 01May 22, 2026Updated:June 18, 2026 खबर साहित्य No Comments3 Mins Read
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    “खबर साहित्य” के इस खास कड़ी में एक ऐसे कलाकार की बात होने जा रही है जिन्होंने पूरे विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। जिला मुंगेली के ग्राम भठलीकला की युवा कलाकार गोपिका कश्यप (ईशा) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का परचम लहराकर पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है।

    गोपिका ने 11 से 15 मई 2026 तक शहर हनोई (वियतनाम) में आयोजित ग्लोबल 19th कॉम्पिटिशन एंड फेस्टिवल – देशराग कलानिधि सम्मान में शुद्ध कत्थक (Pure Kathak) की श्रेणी में मंत्रमुग्ध प्रस्तुति देकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। यह आयोजन नित्य धाम कला समिति, भिलाई द्वारा आयोजित किया गया था। उनकी प्रस्तुति में घुंघरुओं की रुनझुन, भावों की मधुर अभिव्यक्ति और लय की अद्भुत साधना ने दर्शकों का मन मोह लिया। हजारों युवाओं की प्रेरणा बन चुकी गोपिका के पिता भुनेश्वर कश्यप एवं माता जागृति कश्यप (पंचायत सचिव) ने सदैव उनकी कला यात्रा में प्रेरणा और सहयोग दिया।

    गोपिका जी की शिक्षा की बात की जाए तो वर्तमान में गोपिका इंद्रा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से “बी.पी.ए. (बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स – कत्थक)” की शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं तथा कत्थक में ही स्नातकोत्तर करने की तैयारी कर रही हैं।इस मुकाम को हासिल कर के गोपिका ने अपने विश्वविद्यालय का नाम भी रोशन कर दिया है।

    दरअसल यह पहली बार नहीं है जब गोपिका ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया हो। इससे पूर्व वर्ष 2024 में काठमांडू (नेपाल) में आयोजित पशुपतिनाथ महोत्सव में उन्होंने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। इसके अतिरिक्त वे नटवर गोपी किशन अवार्ड 2025, प्रणवम फेस्टिवल 2024, शिवरात्रि महोत्सव, झूमतराना महोत्सव, कृष्ण की महोत्सव 2025 तथा साईनाथ फाउंडेशन जश्न-ए -ज़बा सहित लगभग 16 प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं।

    कहा जाता है कि “सपनों के पंख मेहनत की उड़ान से ही आसमान छूते हैं” — गोपिका की कड़ी मेहनत और उनकी कला ने इस कहावत का जीवंत किया हैं। बचपन से ही उन्हें नृत्य के प्रति विशेष लगाव रहा है और गोपिका चाहतीं हैं कि भविष्य में एक सफल कोरियोग्राफर के तौर पर लोग उन्हें जानें। आने वाले समय में वे अपना स्वयं का डांस क्लास प्रारंभ कर नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा देना चाहती हैं।

    नृत्य के साथ-साथ उन्हें मधुबनी पेंटिंग एवं मेकअप आर्ट का भी शौक है। गोपिका की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत की वह उजली किरण है, जो अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी रोशनी फैला रही है।

    साहित्य36गढ़ आपकी इस महान उपलब्धि के लिए आपको शुभकामनाएं देता है और उज्जवल भविष्य की कामना करता है।


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